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 भारत का विभाजन

मुख्य घटनाएं-

१. सर सैयद अहमद खान, जिसने मोहम्मडन एंग्लो-ओरियन्टल कॉलेज'' की स्थापना की थी और जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कहलाया, को अंग्रेजी सरकार ने इस बात के लिए प्रेरित किया कि वह राजनीति को साम्प्रदायिक बनाएं।

 

२. आगा खान भी सर सैयद अहमद खान के रास्ते पर चला। 1 अक्टूबर १९०६ को लॉर्ड मिन्टों ने शिमला में आगा खान और कुछ मुस्लिम नेताओं की मौजूदगी में कहा था-मेरा यह मानना है कि ऐसी किसी भी तंत्र, जो नगरपालिका या जिला प्रशासन या असेम्बली को प्रभावित करता है, मैं मुस्लिम समुदाय की संख्या में बढ़त करते हुए इसे कौम' के नाम से प्रस्तुत करना आवश्यक है।'' (हेरिटेज ऑफ सिख्स'' लेखक हरबंस सिंह, पृष्ठ २५५)

 

३. सन्‌ १९१६ में, कांग्रेस ने मुसलमानों को कई साम्प्रदायिक कानूनों को, जिसे लखनऊ पेक्ट' कहा गया, पारित करने में मदद की और समर्थन दिया।

 

४. मुस्लिम लीग-कांग्रेस पेक्ट'' के कारण पंजाब में विधान सभा के ५० प्रतिशत सीटें मुसलमानों के लिए आरक्षित की गई। इसकी प्रतिक्रिया में एक प्रतिनिधि स. गज्जन सिंह ने सिखों के विशिष्ट और आरक्षित प्रतिनिधित्व की वकालत की और सिखों के लिए कौम'' शब्द का प्रयोग किया।

 

५. अंग्रेजों की सरकारी नीति के तहत पंजाब में १२ प्रतिशत सिखों को १५ प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया गया। बिहार और उड़ीसा के १० प्रतिशत मुसलमानों को २५ प्रतिशत आरक्षण दिया गया।

 

६. पंजाब में मुसलमानों का पृथक इलेक्टोरल कॉलेज और सीटों का आरक्षण था।

 

७. आरक्षण के इस खेल में, वर्ष १९२८ में मोती लाल नेहरू एक स्कीम लेकर आया। मुस्लिम तुष्टिकरण की स्कीम के बावजूद मुस्लिम मत इस रिपोर्ट के खिलाफ था। मोहम्मद अली जिन्ना मुसलमानों का नेता बन चुका था। उसने विरोध किया।

 

८. १९३६ में मुस्लिम लीग ने पंजाब में मात्र दो सीटें जीती और यूनियनिस्ट पार्टी, जिसके नेता सिकन्दर ह्‌यात खान थे, को सरकार बनाने का अवसर मिला। इस पार्टी में ज्यादातर बडे+ जमीदार थे।

 

९. १९३६ के चुनाव के बाद मुस्लिम लीग और जिन्ना ने असली रंग दिखाना आरम्भ कर दिया था। मुसलमानों को काफिरों (हिन्दुओं) के खिलाफ भड़काया जाता था। जिन्ना और लियाकत अली ने पूरे देश का दौरा आरम्भ कर दिया।

 

 

 

१०. जिन्ना एक नव धर्मान्तरित मुसलमान था। वह देखने में एक छद्म अगं्रेज या ब्राउन साहब नजर आता था। उसमें कभी भी सही मायने में आजादी के आन्दोलन में भाग नहीं लिया। वह जेल नहीं गया। लेकिन चूंकि नया मुर्गा  जोर से बांग देता है, जिन्ना ने मजहब के सहारे सामाजिक माहौल को गरम किए रखा।

 

११. १९४० में मोहम्मद अली जिन्ना ने पृथक मुस्लिम राज्य पाकिस्तान' को मुसलमान बाहुल क्षेत्र में बनाने की बात लोगों के सामने रखी। यह सिखों के लिए हैरान करने वाली बात थी। क्योंकि वे पूरे पंजाब में फैले हुए थे। सम्पूर्ण भारत की हिन्दु जनता में इस बात को लेकर आक्रोश था। लेकिन पं. जवाहर लाल नेहरू का एक महत्वकांक्षी चेहरा  भी सामने आ रहा था।

 

१२. १९४२ में, अंग्रेजी सरकार ने अलग मुस्लिम राज्य अथवा देश बनाने के लिए सर स्टीफोर्ड क्रिप्स कमीशन की घोषणा की। अंग्रेजों की नियत भारत के विभाजन की थी।

 

१३. १९४३ तक, यह विषय सबके संज्ञान में आ गया कि ब्रिटिश हुकूमत भारत का विभाजन करके ही रहेगी। दूसरे विश्व युद्ध के बाद की यह परिणीति थी।

 

 

१४. १६ अगस्त १९४६ को जिन्ना और मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान प्राप्ति के लिए डायरेक्ट एक्सन' की घोषणा की। उनका कहना था कि-मुसलमानों का अहिंसा-विंसा में यकीन नहीं। मुस्लिम गाजी जेहाद के रास्ते पर चलते हैं।'' चारों तरफ दंगे फसाद कराए गए। भारत भू का रंग रक्त से लाल हो गया था।

 

१५. बंगाल में भी एच.एस. सोहरावर्दी, जोकि मुस्लिम लीग का नेतृत्व कर रहा था, ने हिन्दुओं का कत्लेआम प्रारम्भ करवाया।

 

१६. पूरा भारत हत्याओं, बलात्कार, अपहरण और दंगों से त्रस्त हो चुका था। जेहाद की इस आंधी को अंग्रेजों ने हवा दी।

 

१७. फैक्ट फाइर्डिंग ऑर्गेनाइजेशन'' के जी.डी. खोसला के अनुसार, सिखों ने किसी की तुलना में भारत विभाजन का ज्यादा शक्ति से विरोध किया। क्योंकि उनका मानना था कि पाकिस्तान बनना उनके लिए मुसीबत का पहाड़ लेकर आएगा। सिखों की मुस्लिम विरोधी मारक क्षमता के कारण से उत्पन्न स्थितियां उन्हें लीगियों के निशाने पर ले आयी। षिरोमणि अकाली दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के विभाजन के विरोधी एवं अखण्ड भारत के प्रबल समर्थक थें।'

 

१८. दिल्ली में नए वायसराय माउन्टबेटन केवल भारत विभाजन की नियत से आया था।

 

१९. पूरा पंजाब दंगों जल रहा था। यहां तक कि मुसलमानों ने अमृतसर में भी दंगे प्रारम्भ कर दिए। यहां तक कि उन्होंने स्वर्ण मन्दिर पर आक्रमण कर दिए। जिसका मुंह तोड़ जवाब स. उधम सिंह नागोके के जत्थे और सनातनी हिन्दुओं के संयुक्त प्रयास से दिया गया।

 

२०. पं. नेहरू पंजाब और बंगाल के विभाजन के लिए सहर्ष तैयार हो गए, क्योंकि उन्हें प्रधानमंत्री बनने की जल्दी थी।

२१. इस प्रकार १९४७ में भारत का विभाजन हो गया।

 

२२. भारत के विभाजन में लगभग १० लाख लोग से अधिक मारे गए। लगभग ३० लाख घायल हुए। औरतों को अगवा किया गया। औरतों के साथ बलात्कार किया गया। अरबों की सम्पत्ति बरर्बाद हो गई। करोड़ो लोग बेघरबार हो गए।

 

२३. विभाजन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में प. जवाहरलाल नियुक्त किये गया।

 

२४. मजहब के आधार पर आरक्षण की नीति का अन्त विभाजन से हुआ।

 

२५. हुकूमत व कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का अन्त विभाजन से हुआ।

ज्वलंत प्रश्न :

एडविना-नेहरू प्रेम संबंध से आहत थे माउंटबेटन

बेटी पामेला ने इंडिया रिमेम्बर्ड : ए पर्सनल एकाउंट ऑपफ द माउंटबेटंस ड्यूरिंग द ट्रांसपफर ऑपफ पावर' में किया खुलासा।

छमीतनए म्कूपदं ूमतम पद सवअमरू च्ंउमसं

अन्तिम वायसराय माउंटबेटन की बेटी इण्डिया रिमेम्बर्ड : ए पर्सनल एकाउन्ट ऑपफ द माउंटबेटंस ड्यूरिंग द ट्रांसपफर ऑपफ पावर' में खुलासा किया कि पं. जवहार लाल नेहरू और उसकी मां एडविना माउंटबेटन के प्रेम संबंध् रहे हैं।

क्या १९४७ में भारत का विभाजन मजहब के आधर पर नहीं हुआ था?

क्या १९४७ के विभाजन में अंग्रेजों और मुस्लिम लीग के साथ-साथ कांग्रेस की सहमति नहीं थी?

क्या विभाजन के अहदनामें पर कांग्रेस के नेता पं. जवाहर लाल नेहरू के हस्ताक्षर नहीं थे?

सेक्यूलरवाद की बात करने वाले नेहरू मजहब के आधर पर विभाजन के प्रश्न पर सहमत कैसे हो गए?

अंग्रेजों के लिए भारत विभाजन का खेल खेलने वाले वायसराय माउंटबेटन और भारत के नेता पं. नेहरू परस्पर मित्रा कैसे?

भारत विभाजन के पफलस्वरूप हुए दंगों में १० लाख लोगों की हत्या हुई। लाखों-लाख लोग बे घरबार हो गए। करोड़ों अरबों की सम्पत्ति नष्ट हो गई। इसी कालखण्ड में भारत के पहले प्रधनमंत्राी पं. नेहरू वायसराय माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन से प्रेम कर रहे थे। क्या यह राष्ट्रवाद है?

लाखों लोगों की लाशों पर, उस भारी राष्ट्रीय विपदा की स्थिति में कोई व्यक्ति ऐसा जहरीला इश्क कैसे कर सकता है? क्या यह प्रेम का अमानवीय पक्ष नहीं?

क्या भारत के प्रथम प्रधनमंत्राी पं. नेहरू और एडविना माउंटबेटन के प्रेम संबंध् कश्मीर के लिए घातक साबित नहीं हुए?

क्या इस प्रेम संबंध् के माध्यम से जनाब नेहरू ने देश के समक्ष महान उदाहरण प्रस्तुत किया?

क्या पं. नेहरू अंग्रेजों के गुप्तचर विभाग की खुपिफया गतिविध्यिों के शिकार हुए थे?

क्या पं. नेहरू अपनी व्यक्तिगत कमजोरियों के शिकार हुए थे?

गांध्ी जी स्वदेशी की बात करते थे। पं. नेहरू विदेशी महिला की बात कैसे करने लगे?

क्या हम मानें कि हमसे ननकाना साहिब गुरुद्वारा इसलिए छूट गया, क्योंकि हमारा नेतृत्व एक विदेशी महिला पर आसक्त था?

क्या हम यह मानें कि पंजाब-सिन्ध् का क्षेत्रा छोड़ आए। लोगों की जिन्दगियां एडविना माउंटबेटन के सामने तुच्छ हैं?

क्या हम ऐसे नेतृत्व से यह उम्मीद कर सकते थे कि वह अंग्रेजी मानसिकता को त्यागकर भारतीय जीवन दर्शन का एक रोल-मॉडल विश्व के सामने प्रस्तुत करता?

 

 

 

   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
   
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